Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
तस्मान्मया पुरा राम बोधदेहेन तत्तदा ।
तथा कृतमनन्तेन चिन्मयव्योमरूपिणा ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस्रलिए मुझे दुःख की प्राप्ति नहीं हुई. यह कहते हुए उपसंह्ार करते हैं ।
हे श्रीरामभद्र, इसीलिए उस समय बोधरूप देह के कारण अनन्त चिन्मय आकाशरूपी मैंने
पृथ्वी आदि की धारणा बाँधकर पृथ्वी आदि स्वरूप का निर्माण किया था