Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
दिगन्तदशनिस्तीर्णैः करजालैर्जगत्खगम् ।
गृह्णदद्व्यङ्गमर्कत्वं ग्रामवदृष्टभूतलम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसीको कहते हैं ।
भद्र, मैंने अपने सूर्य के स्वरूपका अनुभव किया, उस रूपसे मैंने दसों दिशाओं में फैले हुए
हाथरूपी किरणों से जगत्रूपी पक्षी को पकड़ लिया, जिसके कि बड़े-बड़े पर्वत अवयव थे । उस
समय मुझको यह सारा भूतल एक छोटे से गाँव के सदृश प्रतीत हुआ