Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
कटुकङ्कटकुट्टाकखड्गसंघट्टटांकृतैः ।
पटुस्फुटाटोपरटि भटेष्वटनमुद्भटम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
वीर पुरुषों में रणांगणों में निर्भय विचरण करने का कारण जो उद्भूत पराक्रम प्रसिद्ध
है, वह भी मैं बन गया, जैसा तैसा पराक्रम नहीं, किन्तु अतिकठोर लौहकवचों को तोडनेवाले
खण्डं के परस्पर आघातों से उत्पन्न टंकार ध्वनि से अत्यन्त पट् तथा बड़े भारी आडम्बर से युक्त
पराक्रम बन गया