Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
ज्योत्स्ना मुखेन्दुबिम्बेषु पक्ष्मलेक्षणलक्ष्मसु ।
स्रवत्स्नेहामृतापूरो हाससौहार्दभासनम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
राघव, मुख के सदुश चन्द्रबिम्बं मे ज्योत्सना बन गया, बरौनीवाले
नेत्ररूपी चिह्न से (अंकसे) युक्त मुखरूपी चन्द्रबिम्बं मे तो ज्योत्सना के सदृश बह रहे रनेहरूपी
अमृत का पूर या हास सौहार्दयुक्त कमनीय कान्ति बन गया