Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
नानाह्रदनदीगेहग्राहिणाऽविरताध्वना ।
विश्रान्तं सेतुसुहृदः प्रसादेन क्वचित्क्वचित् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो हनद अनेक नदियों के घर हैं यानी मार्ग के निवासस्थान (विश्रामगृह) हैं, उनका आश्रय करते
हुए तथा निरन्तर प्रवाह के कारण अविरतगतिवाले मैंने बाँधरूपी मित्र के प्रसाद से कहीं-कहीं
विश्राम भी किया