Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
भूतान्यथ भविष्यन्ति वर्तमानानि यानि च ।
भूमण्डलानि तान्यत्र सत्ता सामान्यतां गता ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रिय, जो हो चुके हैं, जो होनेवाले हैं
तथा जो वर्तमान में हैं, वे सभी भूमण्डल स्वाधिष्ठान होने के कारण सर्व-साधारण भावको प्राप्त
आत्मसत्ता के ही स्वरूपभूत हैं यानी आत्मसत्ता से अलग नहीं है