Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
इदमाकाशमात्रात्म तदप्याकाशमात्रकम् ।
अज्ञानात्मपरिज्ञानाज्ज्ञानान्नेदं न तत्क्वचित् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह
प्रसिद्ध भूतल चिदाकाशमात्ररूप है मेरी धारणा से कल्पित भूतल भी चिदाकाशमात्ररूप है। परन्तु
वह जो भासता है, उसमें कारण है-अज्ञानउपहित आत्मा का ज्ञान । आत्मा का ज्ञान हो जाने पर
तो यह दोनों भूमण्डल कहीं पर भी नहीं रहते