Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मक्षिकायौकमशकनिवाससदृशं क्वचित् ।
कुड्यलेशकुभृङ्गारिहलहेलानिकर्षणम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर मक्खी, जूँ एवं मच्छरों के समूहों के निवास के मैले-
कुचैले वर्त्र के सरीखा ही भूतल था और कहीं पर तो छोटी-मोटी भित्तियों के खण्डो तथा प्रमाद
से कमलकोश में सोये हुए दुष्ट भ्रमरो को मर्दित करने के कारण शत्रुरूप हाथियों द्वारा क्रीडा से हल
के सदृश वप्र आदि का आकर्षण भी हो रहा था