Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
शृङ्गमन्दिरमातङ्गप्रहाराशनिभूरुहाम् ।
निबिडाङ्गोत्कटस्थैर्यपरुषापतनं क्वचित् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर पर्वतों की चोटियों पर रहनेवाले हाथियों
के दन्तप्रहाररूप वों के कठोर आघात वृक्षों के घने अवयवों मे विद्यमान दृद स्थिरता की ओर होते
भी मैंने देखे