Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 67
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 67 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
नित्यं कृषीवलैः कृष्टं वीजितं शिशिरानिलैः ।
तापितं तपनैस्तप्तैरुक्षितं प्रावृडम्बुभिः ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
किसान सब मेरे ऊपर प्रतिदिन हल जोतने लग गये ओर शीतल पवन पंखा
डुलाने लगे । मैं सूर्य की तीक्ष्ण किरणों से तापित तथा वर्षा के जल से सिक्त होने लग गया