Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यन्नाम तत्र तत्किंचित्तस्येहाद्य रघूद्वह ।
शृणु नामानि मुख्यानि कल्पितानि भवादृशैः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुवंशियों में श्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी, यहाँ
जो कुछ नाम सुनाई पड़ता है वस्तुतः वह उस चिति का ही नाम है । परन्तु आपके सदृश महानुभावों
ने जिनकी कल्पना की है ऐसे कुछ मुख्य नामों का अब (मैं आपसे वर्णन करता हूँ, आप) श्रवण
कीजिये