Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ततो मुहूर्तमात्रेण लघुः सोऽभ्रमिवाभवत् ।
ततोऽभवद्यष्टिसमस्ततः प्रादेशमात्रकः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद एक मुहूर्तमात्र मे मेच के सदृश वह
हलके हो गये, इसके अनन्तर यष्टि के सदृश, इसके बाद प्रदेशमात्र (अंगूठे से लेकर तर्जनी तक के
नापवाले-वित्ते भरके) हो गये