Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
विद्धि सीकरजालानि भूतानि जगदम्बुधेः ।
वित्तबन्धुवयःकर्मविद्याविज्ञानचेष्टितैः ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस्त विषय का पूर्व मुमुश्च-व्यवहारप्रकरणा में जो कथन किया गया था, उम्रका स्मरण कराते
हुए उसीको कहते हैं ।
संसार के कोई प्राणी तो पूर्व के ही धन, बन्धु, अवस्था, कर्म, विद्या, विज्ञान और चेष्टाओं को
लेकर ही बार-बार उत्पन्न होते हैं