Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
ततो निमेषमात्रेण घोणाश्वासेन खण्डकौ ।
तौ समानीय चिक्षेप पातालान्तरिवानने ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर एक निमेषमात्र में उस
रुद्रने अपने मुख से खीचे गये श्वासवायु से उन दोनों खोपड़ियों को अपने समीप लाकर पाताल-
गुहा के सदृश मुख में फेंक दिया यानी मुख के भीतर डाल दिया