Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
क्वचित्किंचिन्महाशैलजालनिर्विवरावनि ।
क्वचित्किंचिदसंपन्नसर्गमेकाम्बुजोद्भवम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर कुछ जगत् ऐसे देखे कि उनमें पृथ्वी के सभी मानव जरामरण से रहित थे और
कहींपर भगवान् शंकर ऐसी स्थिति में दिखाई दिये कि उनके मस्तकपर चन्द्ररूप भूषण ही नहीं रहा,
क्योकि भूषणरूप चन्द्र की उत्पत्ति ही वहाँ नहीं हुई थी