Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
शिलायामपरं भागं तथैव परया दृशा ।
यावत्तमपि पश्यामि जगदारम्भमन्थरम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
विचारकर ज्यों ही मैंने उसे देखा, त्यों ही वह दूसरा भाग भी अनेक तरह
के जगत् के आरम्भों से (सृष्टियों से) खचा-खच भरा ही मेरी दृष्टि मेँ आया । पहले जिस प्रदेश
को देखा था, उसी तरह से वह भी छिद्राकार में (आकाश में) अनेक तरह के अर्थ से सुन्दर ही लग
रहा था