Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्राकाशमेवाच्छं कचति स्वात्मनात्मनि ।
तथा नाम यदाभाति तदात्मैवं जगत्तया ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तब ग्रबोध होने पर केसे भारता है यह कहते हैं /
प्रबोध होने पर एकमात्र स्वच्छ चिदाकाश ही अपने स्वरूप में अपने से भासता है। जब प्रबोध
नहीं रहता, तब चिदात्मा ही जगत्-रूप से वैसा भासता है, यह निश्चित है