Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 99
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 99 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 99
संस्कृत श्लोक
कुद्दालोलूखलबृसीफलकुम्भकरण्डकैः ।
मुसलोदञ्चनस्थालीस्तम्भैः स्रग्दामधारिणी ॥ ९९ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त देवी के गरले मे पूर्ववर्णित केवल मालावन्धन ही नहीं था, परन्तु कुदाल, यूस्ल, ओखली
आदि भी था, यह कहते हैं ।
कुदाल, ओखली, आसन, हलकी फाल, घट, करण्डक (डला), मूसल, सूप, बटकी, स्तम्भ
आदि की माला धारण कर वह देवी नृत्य कर रही थी