Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 97
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 97 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 97
संस्कृत श्लोक
महती भैरवी देवी नृत्यन्त्यापूरिताम्बरा ।
तस्य कल्पान्तरुद्रस्य सा पुरो भैरवाकृतेः ॥ ९७ ॥
हिन्दी अर्थ
यों उप्र कालरत्रि और उसके नृत्य का सात्विक स्वरूप बतलाकर अब उसके नृत्य का उतरा
आदि से वर्णन करते हैं /
समस्त आकाशमण्डल को पूर्ण कर देनेवाली वह महान् भैरवी कालरात्रि देवी भैरवाकृति उस
कल्पान्तरुद्र के सम्मुख नृत्य कर रही थी