Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 80
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 80 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 80
संस्कृत श्लोक
संहारसर्गनिचया दिनरात्रिभागे बिन्दूपमा रजतयोर्दिवसोत्कराश्च ।
कृष्णाः सिताश्च परितोऽमलशुक्लकृष्णस्वादर्शमण्डलवदाकुलमुल्लसन्ति ॥ ८० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, भगवती कालरात्रि के शरीर में प्रलय एवं सृष्टियों के समूह दिन-
रात के भाग में प्रतीत हो रहे थे, दिन और रात्रि के समूह मलिन एवं अमलिन रजत के विन्दु के
सदश अतिस्वल्प मालूम पड़ रहे थे, शुक्ल-कृष्ण पक्ष सुन्दर निर्मल हीरे एवं इन्द्रनीलमणि के
बनाये गये धवल एवं काले आदर्श-मण्डल के सदृश प्रतीत हो रहे थे