Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
कृष्णा कृशा शिरालाङ्गी जर्जरा वितताकृतिः ।
ज्वालाकुलानलालोलवनसंभारशेखरा ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके रूप का वर्णन करते हैं /
वह रंग में काली थी, पतली थी, उसके सारे अंगों में नस ही नस दीख रही थी, उसके सभी
अंग शिथिल थे, आकृति उसकी विशाल थी, उसका मुख ज्वालाओं से व्याप्त था, चंचल वनसमृद्धि
की नाई पुष्प, पल्लव आदि से विभूषित श्यामल उसका मस्तक था