Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 71
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 71 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
मेरवः पर्णवद्व्यूढा मलयाः पल्लवा इव ।
हिमाद्रयो हिमकणा इवौर्व्योऽब्जलता इव ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
उसकी नाभि
में पृथ्वी की कोमलता के सदृश उस समय शोभा मालूम हो रही थी, क्योकि अनेक मेरु पर्वत ठीक
पत्तों के सदृश प्रतीत हो रहे थे, मलयाचल पल्लव -से भास रहे थे ओर इन पर हिमाचल हिमकण-
सा प्रतीत हो रहा था