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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

त्रिशूलैः पट्टिशैः प्रासैः शरशक्त्यृष्टिमुद्गरैः । निर्यदायुधजालानि स्रग्दामानि बिभर्ति सा ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

त्रिशूल, पट्टिश (पटा), (५) एक तरह का आभूषण (पनवां) । (4) अर्थात्‌ देखने योग्य नमूनेदार अलंकार । (79) साधारणतया “मुद्रिका शब्द का अँगूठी अर्थ है, लेकिन यहाँ पर यह “बाली” के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है । भाला, बाण, शक्ति (बरछी), खड्ग, मुद्गर -इनसे बना जो आयुधो का समूह था, वही पुष्पमाला के रूप में उसने धारण किया था