Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
भ्रमद्भिर्व्याप्तदिक्चक्रा भुजैः कल्पाम्बुदैरिव ।
वर्षद्भिः प्राणिजप्रान्ततारालेखाबृहत्प्रभाः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
कल्पान्त मेघो (८) के तुल्य गजमुक्ताओं तथा प्रलयकाल
में गिर रही तारों की श्रेणी-जैसी भासमान नखों की पंक्तियों की विशाल प्रभाओं को बरसा रही
भ्रमणशील अपनी भुजाओं से भगवती काली ने सारे दिग्मण्डलको व्याप्त कर दिया था