Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
ज्वालापूर्णारघट्टोग्रखाताभनयनत्रया ।
ज्वलद्धरेन्द्रनीलाद्रिसानूपमललाटभूः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर उसके युख से लेकर पैर तक के प्रत्येक अंग का वर्णन करना प्रारम्भ करते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, उस भगवती की तीन आँखें थीं, उनकी उपमा तो तब ठीक मिल सकती हे,
जब कि अरघट्ट यन्त्र के मस्तक के काठ में प्रसिद्ध तीन गड्ढे ज्वाला ओं से परिपूर्ण हो जायें । ओर
उसकी ललाट भूमि की उपमा तो वह प्रसिद्ध इन्द्रनील पर्वत का प्रस्थभाग है, जहो पर पृथिवी जल
रही हो