Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
शुष्कतुम्बीलतेवोच्चैराकाशतरुसंस्थिता ।
विलोलावयवाष्ठीला वातैः पटपटारवा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में
उत्पन्न हुए वृक्ष के ऊपर आरूढ शुष्क-लता-जैसी वह ऊँचे आकाशरूपी वृक्ष के ऊपर आरूढ
थी । वायुओं द्वारा पटपट शब्दों से विभूषित तथा जाँघ तक सभी चंचल अवयवो वाली वह -नीचे
तक अपने चंचल अवयवो से युक्त तथा वायुओं द्वारा पटपट शब्दों से अलंकृत-शुष्क तुम्बीलता-
जैसी ही बिलकुल प्रतीत हो रही थी