Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
प्रलम्बकर्णालुलितनागा नृशवकुण्डला ।
शुष्कतुम्बीलताष्ठीलादीर्घालोलासितस्तनी ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके लम्बे दोनों कानों में
चंचल नाग झूल रहे थे तथा दो मृतक कुण्डल के रूप में विराजमान थे । शुष्क तुम्बी-लता की तरह
अतिदीर्घ, अत्यन्त चंचल तथा काले वर्ण के उसके दोनों स्तन जाँघ तक लटक रहे थे