Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 62
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
एति नाशविदा नाशं महाकल्पादिवेदनैः ।
जायते जन्मसंवित्त्या व्योम्नि सर्वादिवेदनैः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
(कथं वा परिनश्यतः“ उत्का उत्तर देते हैं /
महाकल्पादि के संकल्पो द्वारा नाशसंवित् से वह ब्रह्माण्ड नष्ट होता है ओर सबकी सृष्टि के
आरम्भ में सृष्टि-संकल्पों द्वारा जन्मयुक्त संवित् से चिदाकाश में वह उत्पन्न होता है