Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तत्तदूर्मिगिरिव्रातखगैरावलिताः खिलाः ।
विच्छिन्नाः कल्पजलदा जल एव निलिल्यिरे ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उन
अनेक तरह के तरंग से तैरते हुए पर्वत समूहों तथा देवादिशरीरों से तोड़-फोड़ दिये जाने के
कारण छिन्न-भिन्न हुए कल्पान्तं के पुष्करावर्त आदि मेघ सब जल में ही विलीन हो गये