Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
ऊर्ध्वे ब्रह्माण्डखण्डस्य तथाधस्तान्मुनीश्वर ।
तज्जलादिमहाकारं क्व कथं केन धार्यते ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
अकशिष्ट चोथे प्रश्न का स्मरण दिलाते हुए श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं /
हे मुनीश्वर, ब्रह्माण्डखण्ड के ऊपर तथा नीचे उससे भी उत्तरोत्तर दश-दश गुना अधिक
विस्तारवाला होने के कारण महान आकाशवाले जलादि को कहाँ कौन कैसे धारण करता
हे ?