Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
ततस्तथैव ज्वालात्म तेजो दशगुणं स्थितम् ।
ततस्तथैव पवनः पवनो निर्मलः स्थितः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद जल से दशगुना ज्वालात्मक तेज
अवस्थित है । उसके अनन्तर जल के समान ही उस जल को पवित्र करनेवाला तथा स्वयं निर्मल
पवन स्थित है