Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
स चैकांशैकरूपात्मा नास्ति तस्य हि साकृतिः ।
तथा दृश्यत एवासौ भ्रान्तिमात्रेण मूर्तिमान् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि वह एकमात्र आकाशस्वरूप ही हैं. तो फिर निराकार उसकी पूर्ववर्णित देहाक्रति क्यो
ड्ृष्टियोचर हुई 2 इस पर कहते हैं /
और वह रुद्र समस्त कार्यविशेषों के प्रलय के बाद अवशिष्ट कारण के एक अंशमात्र के
आकारवाला है । उसकी देहाकृतिका जो मेने वर्णन किया है यथार्थ में वह कुछ नहीं है, क्योकि
उसका कोई आकार ही नहीं है । उपासक लोग अपनी वासना से एकमात्र भ्रान्ति द्वारा उसे वैसा
मूर्तिमान देखते ही है