Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
सर्वभूतात्मभूतत्वात्सर्वगत्वान्महाकृतिः ।
यानि तस्यानुषक्तानि पञ्च खानीन्द्रियाण्यलम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
उस अहंकार की सम्पूर्णं जीवों के प्रत्येक शरीर में बिलकुल
अनुषक्त जो पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं उन्हींको तत्त्वज्ञानी लोग रुद्र भगवान् के पाँच मुख कहते है ।
एकमात्र यही कारण है कि ज्ञानेन्द्रियोँ सब ओर से प्रकाशस्वभाव हैं