Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
मणिस्तम्भसहस्रेण वृतोऽग्रे प्रोतमेरुणा ।
इन्द्रायुधसहस्राढ्यकल्पसंध्याभ्रसुन्दरः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यह हजारों मणिमय खम्भों से घिरा है, जिसके अग्रभाग में नीचे मुँह करके पिरोये गये
सुमेरु की नाई गुग्गुल लगे हुए है । यही कारण है कि कहीं-कहीं हजारों इन्द्रधनुष से व्याप्त-जैसा
तथा कहीं-कहीं प्रलयकालीन संध्या के मेघों जैसा यह सुन्दर दिखता है