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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मलोकजनं सर्वं महतामिव वासनाम् । नापश्यं स्वप्ननगरं बुध्यमान इवाग्रगम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

एवोक्त विधाता के पारिवारिक लोगों में भी ऐसा ही केवल्य हआ. यह कहते हैं / ब्रह्माजी के परिवार के जितने लोग थे, उन सबको भी मैंने अपने सामने तत्त्वज्ञानियों की ज्ञान से बाधित पूर्ववासना की तरह बिल्कुल ऐसे नहीं देखा, जैसे सोकर उठता हुआ पुरुष स्वप्न काल में देखे गये नगर को अपने सामने उपस्थित नहीं देखता