Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verses 3–5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verses 3–5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 3-5
संस्कृत श्लोक
समूहश्चैव देवानां मुनीनां भावितात्मनाम् ।
शुक्रो बृहस्पतिश्चैव शक्रो वैश्रवणो यमः ॥ ३ ॥
सोमोऽथ वरुणोऽग्निश्च तथान्येऽपि सुरर्षयः ।
देवगन्धर्वसिद्धानां साध्यानां च विनायकाः ॥ ४ ॥
लिपिकर्मार्पिताकाराः सर्वे ध्यानपरायणाः ।
बद्धपद्मासनास्तत्र निर्जीवा इव संस्थिताः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने अधिकारी देवों तथा भावितात्मा मुनियों के समूह को देखा । हे श्रीरामचन्द्रजी, उस समूह के
भीतर मैंने शुक, बृहस्पति, इन्द्र, कुबेर, यम, सोम, वरुण और अग्नि को देखा तथा इनके अतिरिक्त
वहाँ मैंने और भी अनेक देवताओं ओर ऋषियों को देखा । इतना ही नहीं सुनिये-वहाँ देव, गन्धर्व,
सिद्ध और साध्यो के नायक भी उपस्थित थे, मैंने उन्हें भी देखा । हे श्रीरामचन्द्रजी, पद्मासन लगाकर
बैठे हुए, चित्रलिखित जैसे, ध्यान में परायण वे सबके सब निर्जीव के समान वहाँ स्थित थे