Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
मृतशिष्टान्पुरभ्रष्टान्फेनाद्रितटिकोटिषु ।
दधज्जलबलश्रान्तांस्त्रिदशान्मशकानिव ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जो मरने से बच गये थे और अपने-अपने नगरों से च्युत हो गये थे, ऐसे
जल के बल पर विश्राम किये हुए देवताओं को-मच्छरों के सदृश-फेनरूपी पर्वतों की तटों और
कोटियों पर (शिखरों पर) धारण कर रहा था