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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

शून्यब्रह्माण्डविषुलजलघातकुलायके । नीलानचलकाकोलाञ्जहन्सलिलजालकैः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, उस शून्य ब्रह्माण्डरूप घोंसले के भीतर, जो कि एकमात्र विपुल जलसमूह से ही बना था, विद्यमान नील -पर्वत रूप महान्‌ द्रोणकाक-पक्षियों का (डोम कौओं का) वह समुद्र अपने जलरूपी जालो से आहरण कर रहा-सा मालूम पडता था