Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
भ्रमद्बुद्बुदविश्रान्तभ्रान्तकल्पान्तवारिदः ।
उत्तालैस्तैरनाधारैः पश्यन्नपरवारिदम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समुद्र में इधर-उधर नाच रहे बुलबुलों पर कल्पान्त के
महामेघ विश्राम कर रहे थे और स्वयं नाच भी रहे थे, वे बुल्ले एक तरह से आँखों की पुतली -से प्रतीत
हो रहे थे। हाँ, प्रसिद्ध पुतलियों से इनमें विलक्षणता अवश्य थी, क्योकि इनका आधारभूत मुख ही
यहाँ नहीं था, इन पुतलियों से समुद्र समीप के दुसरे मेघ को मानों देख रहा हो - ऐसा प्रतीत हो
रहा था