Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verses 8–9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verses 8–9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
तद्धि रौद्रं वपुस्तत्र तन्मध्ये लोचनत्रयम् ।
तद्द्वादशपरीमाणं दीप्तं वृन्दं विवस्वताम् ॥ ८ ॥
सर्वदिक्कं ददाहोच्चैः शुष्कं वनमिवानलः ।
अथोदभूज्जगत्खण्डशोषणग्रीष्मवासरः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, उस ग्यारहवे सूर्य में वे तीनों सूर्य भगवान् रुद्र के
शरीर हैं । उस भगवान् रुद्र के शरीर के मध्य में तीन नेत्र हैं वारह सूर्यो के आकार के बराबर
परिमाणवाला प्रदीप्त सूर्यो का समूह होकर वह रौद्र शरीर सभी दिशाओं को खूब जोर से जलाने
लगा, जैसे सूखे जंगल को अग्नि | तदनन्तर जगत्खण्ड को शुष्क बना देने वाला ग्रीष्म ऋतु का दिन
प्रकट हुआ