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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 63

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

कल्पान्तः स्मारयन्मूर्खानगादस्मरणीयताम् । तापोपतापपरमाः परमारणतत्पराः । वह्नयोऽपह्नवं चक्रुर्जगतामसतामिव ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

ताप ओर उपताप में परम यानी सबसे बढ़े-चढ़े तथा दूसरों को मारने में तत्पर प्रलयकाल के पवनं ने सम्पूर्णं भुवनों का, खरगोश के सींग आदि असद्रूप पदार्थों की तरह, सर्वथा अत्यन्तअभाव कर दिया