Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
पपाठ शब्द आग्नेयो ज्वालातटतटोद्भवः ।
लोकपालपुरापाततप्ताङ्गाराद्रिभित्तयः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
श्रीरामचन्द्रजी, ओर सुनिये-उस समय प्रलयकालीन मेघो की निवृत्ति से वृष्टिशून्य दसो दिशाएँ भी
लोकपालों के नगरों के गिरने से दाह में सन्तप्त हुए अंगारों से परिपूर्ण पर्वतो की भित्तियाँ होती हुई
उन्मत्तवृत्ति होकर व्याकुलता को प्राप्त होने लगीं