Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
ननृतुर्नीरसा नाशनर्तक्यः केतुकुन्तलाः ।
तलाहितानलज्वाला ब्रह्माण्डोर्ध्वकपाटभूः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्माण्ड का उर्ध्वभाग ही जिसका कपाट है ऐसी पृथिवी अपने अधोभाग में स्थापित अग्नि की
ज्वालाओं से व्याप्त होती हुई भाड़ की वह खपड़ी तैयार हो गई, जहाँ पर भून जा रहे दानो की
जगह अत्यन्त क्लेशयुक्त शब्दसहित गिरते हुए एकमात्र प्राणियों के समूह ही विद्यमान थे