Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
वह्निलोकमिव व्योम्नि वडवाग्निमिवार्णवे ।
ततोऽपश्यमहं दीप्तं सूर्यं नैर्ऋतदिङ्मुखे ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद आकाश में अग्निरोक के तुल्य तथा सागर में
बड़वानल के समान प्रदीप्त हुए एक और सूर्य को मैंने नैर्क्रत्यदिशा में उदित देखा