Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तापतप्तोन्नमद्भूतज्वरितार्णवपर्वतम् ।
हृदयस्फोटनिःसारपतद्विद्याधराङ्गनम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
सन्ताप से सन्तप्त होकर उछलते
हुए प्राणियों द्वारा सभी सागरो एवं पर्वतं को वह ऐसा बना रहा था, मानों उन्हे ज्वर आ गया हो ।
हृदय फटने से सारहीन हो जाने के कारण विद्याधरो एवं उनकी अंगनाओं को गिराने में वह बराबर
तत्पर हो रहा था