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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

उत्तप्ताम्बूदराखिन्नजलेचरमहार्णवम् । सर्वदिक्कानलप्लोषक्षीणाक्रन्दपुरान्तरम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

सारे महानगरों के जलजन्तुओं को, जो उनके उदर में रह रहे थे, सन्तप्त हुए जलों से व्याकुल कर रहा था । सारी दिशाओं में व्याप्त अग्नि के दाह से उसने भिन्न-भिन्न अनेक नगरों के प्राणियों को मारकर उन्हें रोदन से शून्य बना रखा था । उनमें रोनेवाला कोई एक भी प्राणी न रह जाय, ऐसा उन्हें कर रखा था