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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verses 12–13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 12,13

संस्कृत श्लोक

दृढहस्ततलाघातहतकन्दुकवन्नभः । अपश्यं गगनस्थोऽहमुदितं चण्डतेजसम् ॥ १२ ॥ तपन्तं द्वादशादित्यगणं दिक्षु दशस्वपि । बृहत्तत्र सतारावज्वालेव भगणं चलम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

और प्रबल हथेली के आघात से मारे जा रहे गेंद की तरह आकाश में जाकर वहाँ स्थित हो मैंने उदित हुए प्रचण्ड तेजयुक्त तप रहे बारह सूर्य समूह को दसो दिशाओं मे भी देखा । तथा उन दिशाओं मेँ तारों के सहित आकाश को व्याप्त कर देनेवाली ज्वाला के समान चंचल वर्तुलाकार वृहत्‌ नक्षत्रचक्र देखा