Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
देहान्तः कृमयस्तस्य भूतप्रेतपिशाचकाः ।
लोकान्तराणि रन्ध्राणि सुषिराण्यस्य देहके ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
भूत, प्रेत, पिशाच आदि उसके शरीर के भीतर रहनेवाले रक्त माँस आदि
अपवित्र पदार्थो के लोलुप ये कीड़े हैं, सूर्य ओर चन्द्र आदि लोक उसके शरीर के छिद्र हैं तथा
यमलोक आदि नरक के लोकान्तर उसके चक्षु आदि शरीर के नीचे के सूराख हैं