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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । संकल्पात्स विराडेव खमेवाकृतिमागतम् । अस्तु नाम स्वदेहान्तः कथं ब्रह्मैव तिष्ठति ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

(अस्तु नाम“ यहाँ तक के पदसे महाराज वस्तिष्ठजी का कथन स्वीकार करते हुए श्रीरामचन्द्रणी अवशिष्ट प्रश्न का स्मरण कराते हैं श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, संकल्प से चिदाकाशरूप वह विराट्‌ ही साकारता को प्राप्त हुआ, यह तो मैंने स्वीकार कर लिया, किन्तु कृपाकर यह कहिये कि वह ब्रह्मा अपने शरीर के भीतर रहते कैसे हैं ? (७)