Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 57
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
श्लेष्मपित्तानिलास्तस्य चन्द्रार्कपवनास्त्रयः ।
ग्रहा ऋक्षगणास्तस्य प्राणाष्ठीवनसीकराः ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्र, सूर्य और पवन - ये तीनों उस हिरण्यगर्भ के कफ, पित्त और वायुरूप हैं और दूसरे जो ग्रह
तथा नक्षत्र समूह हैं वे उसके प्राणष्ठीवन के सीकर हैं यानी प्राण द्वारा बाहर निकले हुए थूक के
कफबिन्दु हैं